सोलन: नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ जिले भर के मंदिरों में श्रद्धा और आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला। माँ दुर्गा के उग्र और शक्तिशाली स्वरूप के रूप में पूजी जाने वाली कालरात्रि को अंधकार और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली देवी माना जाता है। अपने भयंकर रूप के बावजूद वह भक्तों को शुभ फल प्रदान करती हैं, इसी कारण उन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है।
इस अवसर पर सोलन के विभिन्न मंदिरों, विशेषकर शनि मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। 19 मार्च से आरंभ हुए नवरात्र पर्व के दौरान भक्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सातवें नवरात्रे के दिन उत्साह अपने चरम पर पहुंच गया। दोपहर लगभग 1:15 बजे से अष्टमी तिथि आरंभ होने के साथ ही श्रद्धालु अष्टमी और नवमी की तैयारियों में भी जुट गए हैं।
श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर माता रानी के दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। सोलन निवासी प्रीतम राम ने बताया कि वे पहले नवरात्रे से ही लगातार मंदिर में दर्शन के लिए आ रहे हैं और यहां का माहौल अत्यंत भक्तिमय है। वहीं श्रद्धालु राज गुप्ता ने माता के प्रति अपनी गहरी आस्था व्यक्त करते हुए कहा कि माता रानी की कृपा से उन्हें जीवन में अपार सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि माता के दरबार में कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता और सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंदिरों में भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के चलते पूरा वातावरण भक्ति रंग में रंगा हुआ है।
सोलन: सातवें नवरात्र पर माँ कालरात्रि की आराधना, सोलन के मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़