नगर निगम सोलन के वार्ड नंबर-16 के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों ने अपने इलाकों को नगर निगम से हटाकर पुनः पंचायत में शामिल करने की मांग उठाई है। इस संबंध में पार्षद सीमा के नेतृत्व में चार गांवों के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त सोलन से मिला और अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
पार्षद सीमा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों को नगर निगम में शामिल किए जाने के बाद लोगों को पूर्व में मिलने वाली कई सुविधाएं बंद हो गई हैं। उन्होंने कहा कि इन गांवों के अधिकांश लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं, लेकिन अब उन्हें कृषि कार्ड के माध्यम से मिलने वाले बीज, सिंचाई उपकरण, स्प्रे मशीन और टैंक निर्माण जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। नगर निगम के पास कृषि एवं सिंचाई से संबंधित योजनाओं के लिए पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं, जिससे ग्रामीणों को परेशानी हो रही है।
ग्रामीणों ने निगम में शामिल होने के बाद बढ़े टैक्स को भी बड़ी समस्या बताया। उनका कहना है कि जब उन्हें निगम से कोई विशेष सुविधा नहीं मिल रही है, तो उन पर कर का अतिरिक्त बोझ डालना अनुचित है। खेतों में मेहनत करने वाले किसानों के लिए अपनी ही जमीन पर टैक्स देना कठिन हो गया है।
इसके अलावा, विकास कार्यों में वन विभाग की एनओसी भी बड़ी बाधा बन रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव सड़कों से दूर हैं और जब भी सड़क निर्माण या अन्य कार्य शुरू किए जाते हैं, तो वन भूमि के कारण अनुमतियां लेने में देरी होती है, जिससे योजनाएं अधर में लटक जाती हैं।
उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि इस विषय पर विचार किया जाएगा। पार्षद सीमा ने कहा कि वह इस मुद्दे को लगातार उठाती रहेंगी ताकि ग्रामीणों को उनकी सुविधाएं वापस मिल सकें और अनावश्यक कर भार से राहत मिल सके।
सोलन: नगर निगम से हटाकर पंचायत में शामिल करने की मांग, वार्ड-16 के ग्रामीणों ने डीसी से लगाई गुहार