अर्की तहसील की पांच पंचायतों के ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर आ गया है। ‘धार देवता सीमेंट प्रभावित जन कल्याण समिति’ के बैनर तले उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर लोगों ने अडाणी-अंबूजा ग्रुप की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप है कि जब से प्रबंधन अडाणी समूह के हाथ में गया है, तब से इलाके में ‘तानाशाही’ और ‘मोनोपोली’ का राज शुरू हो गया है। 6 जनवरी 2025 को ‘चोला माइनिंग’ क्षेत्र में हुए भीषण ब्लास्ट का जिक्र करते हुए लोगों ने कहा कि उस दिन पूरा इलाका थर्रा उठा था—घर हिल गए, दीवारों में दरारें पड़ गईं और बच्चे दहशत में आ गए। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर अवैध और खतरनाक ब्लास्टिंग कर रही है, जिससे उनकी जान और स्वास्थ्य दोनों खतरे में हैं।ग्रामीणों ने प्रशासन पर भी गंभीर आरोप जड़े। समिति के अध्यक्ष धीरज ठाकुर के अनुसार, हादसे के बाद एफआईआर दर्ज करवाने गए लोगों पर दबाव बनाकर शिकायत वापस करवाई गई और तीन महीने बाद भी कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। लोगों ने विस्थापन, लंबित मुआवजे और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, साथ ही चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन उग्र होगा। उन्होंने ‘दलालों’ की भूमिका की मजिस्ट्रेट जांच की भी मांग की। उपायुक्त ने जांच का आश्वासन तो दिया, लेकिन कानून हाथ में न लेने की हिदायत भी दी। अब सवाल यही है—क्या प्रशासन कंपनियों के दबाव में झुकेगा या प्रभावित ग्रामीणों को न्याय मिलेगा।