नगर परिषद से नगर निगम बनने के बाद शहर में विकास की उम्मीदें अब निराशा में बदलती नजर आ रही हैं। स्थानीय व्यापारी सुधीर आहूजा ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि निगम बनने के बाद सुविधाएं बढ़ने के बजाय जनता की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
आहूजा का कहना है कि नगर परिषद के मुकाबले निगम को अधिक फंड मिल रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई लाभ नहीं दिख रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि जो कार्य पहले आसानी से हो जाते थे, वे अब लंबित पड़े हैं।
निगम कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जेई और एसडीओ जैसे अधिकारी अक्सर अपनी सीट पर नहीं मिलते और “साइट पर होने” का हवाला देकर लोगों को टाल दिया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अधिकारियों के पास कोई लॉगबुक है, जिससे उनकी उपस्थिति और कार्य की जानकारी मिल सके।
आहूजा ने कहा कि निगम में जिम्मेदारी तय करने के बजाय फाइलों को एक-दूसरे पर डालने का चलन बढ़ गया है, जिससे आम लोगों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वार्ड पार्षद भी अपने क्षेत्रों के कार्य न होने से परेशान हैं।
शहर की बुनियादी सुविधाओं पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें खराब हैं और कूड़े के ढेर लगे हुए हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि नगर निगम बनने से जनता पर टैक्स का बोझ तो बढ़ा है, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं। उन्होंने प्रशासन से व्यवस्था सुधारने और लोगों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की है।
सोलन: नगर निगम बनने के बाद सुविधाएं घटीं, टैक्स का बोझ बढ़ा: सुधीर आहूजा (STAR TODAY NEWS)