हिमाचल प्रदेश में शिक्षा विभाग की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है, जहां छह साल बीत जाने के बाद भी विद्यालय भवन निर्माण अधूरा पड़ा है। गांव के लोगों ने बताया कि इतने वर्षों में बच्चे तीन से चार अलग-अलग अस्थायी भवनों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। प्राथमिक विद्यालय की इमारत झरझर हालत में है और निर्माण स्थल तीन स्कूलों का केंद्र होने के बावजूद अब तक केवल 27 खंभे ही खड़े किए जा सके हैं।
करीब 1 करोड़ 24 लाख रुपये इस परियोजना पर खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन काम की प्रगति नगण्य है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने धन से कम से कम दो-तीन कमरे बन जाने चाहिए थे। निर्माण में देरी का कारण विभागीय कमी, फंड की अनुपलब्धता और गलत स्थल चयन बताया जा रहा है। प्रारंभिक स्तर पर चुना गया स्थान पूरी तरह अनुचित था, जिससे न केवल धन की बर्बादी हुई बल्कि आसपास के घरों के लिए खतरा भी पैदा हो गया।
इस मामले की जानकारी विधायक डॉ. धनीराम शांडिल और शिक्षा उपनिदेशक ऋतु शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जाएगी कि आखिर इतना धन खर्च होने के बावजूद कार्य क्यों नहीं हुआ। शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब किया जाएगा तथा वित्त विभाग से शीघ्र फंड जारी करने को कहा गया है। डॉ. शांडिल ने कहा कि कार्य जल्द शुरू करवाया जाएगा और वह स्वयं निर्माण कार्य की निगरानी करेंगे ताकि स्कूल भवन सुरक्षित व समय पर पूरा हो सके।