रौशनी डे केयर सेंटर बना विशेष बच्चों के जीवन में आत्मविश्वास की नई किरण सोलन

सोलन के समीप स्थित रौशनी डे केयर सेंटर आज उन विशेष बच्चों के जीवन में नई ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की भावना जगा रहा है, जिन्हें समाज अक्सर कमतर समझता है। यहाँ करीब 20 विशेष बच्चे हर दिन आत्मविश्वास, अनुशासन और स्वावलंबन की शिक्षा लेकर अपने जीवन को नई दिशा दे रहे हैं।बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें वे अपने हाथों से मोमबत्तियाँ, सजावटी वस्तुएँ और मिठाइयाँ बनाना सीखते हैं। दीपावली के अवसर पर बच्चों ने स्वयं कैंडल्स और लड्डू-बर्फी की ट्रे तैयार की है। इन्हें बेचकर मिलने वाले पैसों से वे अपनी छोटी-सी पार्टी करेंगे—यह उनके आत्मविश्वास की सबसे बड़ी मिसाल है।सेंटर की प्रिंसिपल राधिका कपूर बताती हैं कि संस्थान में बच्चे सुबह 10 बजे से शाम 3:30 या 4 बजे तक सामान्य स्कूल की तरह दिनचर्या का पालन करते हैं। उन्हें जीवन की मूलभूत बातें सिखाई जाती हैं, जैसे—खाने-पीने का सलीका, साथ बैठकर भोजन करना और अनुशासित रहना। राधिका कपूर कहती हैं कि “हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे समाज में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।बाइट प्रधानाचार्य संस्था के उपाध्यक्ष अध्यक्ष आर.एस. चंदेल, जो शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं, वर्ष 1990 से दिव्यांग बच्चों के लिए कार्य कर रहे हैं। वे बताते हैं कि यदि समाज, अभिभावक और मीडिया साथ दें, तो रौशनी डे केयर सेंटर को भारत स्तर पर ले जाया जा सकता है। यह केंद्र आज सोलन ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल के लिए प्रेरणा का उजाला बन चुका है।बाइट उपाध्यक्ष आरएस चंदेल