बिजली बोर्ड और नगर निगम के आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी नौकरी की सुरक्षा और स्थायी नीति की मांग को लेकर आवाज़ बुलंद की है। बिजली बोर्ड के बिलिंग स्टाफ के प्रतिनिधि वीरेंद्र मोहन ने बताया कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से विभाग की रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं, फिर भी आज उन्हें नौकरी जाने का डर सता रहा है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई अस्थायी कर्मचारी हटाए जा चुके हैं, जिससे भविष्य को लेकर भारी चिंता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि एक ठोस नीति बनाई जाए और बोर्ड में ही समायोजन किया जाए। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासन के बावजूद वे चाहते हैं कि दिवाली से पहले कोई अधिसूचना जारी हो, ताकि वे त्योहार खुशी से मना सकें।
नगर निगम के सफाई कर्मचारियों की ओर से दीपक ने बताया कि वे 7–8 वर्षों से कार्यरत हैं, परंतु अब तक उनके लिए कोई नीति नहीं बनी है। सैलरी संबंधित समस्याएं भी बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि उनका कार्य अत्यंत आवश्यक है और सरकार को उनकी ओर ध्यान देना चाहिए।
वहीं, आम जनप्रतिनिधि प्रताप सिंह ठाकुर ने चिंता जताई कि काम करने वाले लोगों को बेरोजगार किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से अपील की कि वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को विभाग में ही समायोजित किया जाए और गरीबों पर संकट न डाला जाए।byte Virendra Mohan ,Deepak,Pratap Singh Thakur