पहले जहां सरकारी अस्पतालों में इलाज गरीबों और जरूरतमंदों के लिए सहारा हुआ करता था, वहीं अब हिमाचल प्रदेश सरकार के नए फैसले ने आम जनता को एक और आर्थिक झटका दे दिया है। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में अब पर्ची बनवाने के लिए मरीजों को 10 रुपये परामर्श शुल्क देना होगा। यह शुल्क हर मरीज से पंजीकरण के समय वसूला जाएगा, चाहे वह किसी भी बीमारी के लिए अस्पताल आया हो।सरकार ने इस फैसले के पीछे तर्क दिया है कि यह राशि रोगी कल्याण समितिकी ओर से दी जाने वाली सुविधाओं — जैसे स्वच्छता, बुनियादी ढांचे और उपकरणों के रख-रखाव को बेहतर बनाने के लिए ली जा रही है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार की यह व्यवस्था वास्तव में गरीब जनता की भलाई के लिए है या फिर उनके बजट पर अतिरिक्त भार डालने का तरीका? वहीं क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के एमएस डॉ. राकेश पंवर ने भी पुष्टि की है कि अस्पताल में अब पर्ची के लिए 10 रुपये लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय RKS की बैठक में चर्चा के बाद लागू किया जाएगा। उन्होंने साफ़ किया कि यह पर्ची का शुल्क नहीं है बल्कि सरकारी अस्पताल में तैनात चिकित्स्कों की कंसल्टेशन फीस है। बाइट क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के एमएस डॉ. राकेश पंवर गौर करने वाली बात यह है कि पहले यह पर्ची निःशुल्क बनती थी, जिससे गरीब तबके के लोग बिना किसी अतिरिक्त खर्च के सरकारी अस्पतालों की सेवाओं का लाभ उठा पाते थे। अब इस शुल्क के चलते पहले ही महंगाई की मार झेल रही जनता पर एक और बोझ लद गया है।स्वास्थ्य जैसे मूलभूत अधिकार के लिए अब आम जनता को भी जेब ढीली करनी होगी। सवाल यह भी उठता है कि अगर शुरुआत 10 रुपये से हुई है तो क्या भविष्य में अन्य सेवाओं के लिए भी शुल्क बढ़ाए जाएंगे?