सोलन की निशा ठाकुर ने बनाई ‘द लेडी कॉप’, कहती हैं – ‘एक भी युवा ने ड्रग्स छोड़ा तो वही सबसे बड़ा अवार्ड’
सोलन/मुंबई: पहाड़ों की बेटी ने मुंबई की चकाचौंध में अपनी पहचान तो बना ली, लेकिन दिल आज भी अपनी मिट्टी के लिए धड़कता है। सोलन की रहने वाली निशा ठाकुर पिछले 15 साल से मुंबई में फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर के रूप में काम कर रही हैं। लेकिन जब लॉकडाउन के दौरान वह अपने घर लौटीं तो देवभूमि के युवाओं को नशे के दलदल में धंसते देखकर उनका मन व्यथित हो उठा। बस यहीं से शुरू हुआ एक मिशन – हिमाचल को नशा मुक्त बनाने का संकल्प।
लॉकडाउन में दिखी अपने पहाड़ की पीड़ा
निशा बताती हैं कि मुंबई में उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया, लेकिन जब कोरोना काल में वह घर लौटीं तो वहां के हालात देखकर सब कुछ भूल गईं। हिमाचल का युवा नशे की गिरफ्त में था। निशा कहती हैं, “उस वक्त हिमाचल के हालात और यूथ की स्थिति अच्छी नहीं थी। मैंने सोचा कि सबके घर तक एक संदेश पहुंचाना चाहिए।”
इसी सोच के साथ उन्होंने एक ऐसा प्रोजेक्ट बनाने का फैसला किया जो हर घर, हर माता-पिता और हर उस युवा तक पहुंच सके जो नशे में डूबा हुआ है। वह चाहती थीं कि उनका काम सिर्फ मनोरंजन न हो, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी दे।
DIG अंजुम आरा से मिली प्रेरणा, बनाई ‘द लेडी कॉप’
निशा ठाकुर ने हिमाचल पुलिस की तत्कालीन डीआईजी अंजुम आरा और उनके कार्यकाल में आए बदलावों से प्रेरित होकर ‘द लेडी कॉप’ नामक फिल्म बनाई है। यह फिल्म अब हंगामा ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है।
निशा बताती हैं कि यह फिल्म सिर्फ उनकी अकेले की मेहनत नहीं है। इसमें हिमाचल सरकार और पुलिस प्रशासन का भी पूरा सहयोग रहा है। फिल्म के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई है कि एक पुलिस वाला एक इंसान की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात एक कर देता है। वह अपनी जान जोखिम में डालकर युवाओं को ड्रग्स से दूर रखने का प्रयास करता है।
सफलता का अनोखा पैमाना – ‘एक युवा ने नशा छोड़ा तो वही सबसे बड़ा अवार्ड’
फिल्म की सफलता के बारे में निशा का नजरिया बेहद प्रेरणादायक है। बॉक्स ऑफिस के आंकड़े या क्रिटिक्स की तारीफ उनके लिए मायने नहीं रखती। वह कहती हैं, “अगर मेरी इस मूवी को देखकर हिमाचल का एक भी लड़का ड्रग्स छोड़ देता है, तो मेरे लिए उससे बड़ा कोई अवार्ड नहीं है। मेरे लिए उससे बड़ी कोई सक्सेस नहीं है।”
यह सोच दिखाती है कि निशा के लिए यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का निर्वाह है। उन्होंने अपनी कला को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया है।
पूर्व मुख्यमंत्री और अधिकारियों का मिला सहयोग
निशा ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कई लोगों का सहयोग मिला। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, तत्कालीन एसपी सोलन अभिषेक यादव और सांसद सुरेश कश्यप का आभार व्यक्त किया है। निशा कहती हैं कि इन लोगों ने उन्हें इस रास्ते पर चलने की हिम्मत दी और हर कदम पर साथ खड़े रहे।
‘मुंबई में रहती हूं, लेकिन दिल हिमाचल के लिए धड़कता है’
निशा गर्व से कहती हैं, “मैं सोलन की रहने वाली हूं और मुझे इस बात पर गर्व है। बेशक आज मैं मुंबई में रहती हूं, लेकिन मेरा दिल आज भी हिमाचल के लिए धड़कता है।”
निशा का मानना है कि मुंबई ने उन्हें प्लेटफॉर्म दिया, लेकिन हिम्मत और हौसला उन्हें उनके पहाड़ों ने दिया है। वह कहती हैं, “मैं जहां भी रहूं, मेरी पहचान एक हिमाचली के रूप में ही रहेगी।”
निशा को हिमाचल के राज्यपाल से मिले सम्मान पर भी गर्व है, जिसे वह अपना नहीं बल्कि अपने पहाड़ों का सम्मान मानती हैं।
हिमाचल को मिले मजबूत युवाओं की पहचान
निशा ठाकुर चाहती हैं कि हिमाचल को लोग सिर्फ उसकी खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि उसके मजबूत और समझदार युवाओं की धरती के रूप में भी जानें। वह ऑन स्क्रीन काम करके पुलिस प्रशासन की ऑन फील्ड मेहनत को सपोर्ट कर रही हैं।
परिवारों से अपील – जरूर देखें ‘द लेडी कॉप’
निशा का हर युवा से और उनके परिवार से निवेदन है कि वे ‘द लेडी कॉप’ जरूर देखें। वह कहती हैं, “यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, यह समाज की आवाज और एक सच्चाई है।”
निशा ठाकुर की यह पहल साबित करती है कि असली कामयाबी वही है, जब अपने प्रदेश और अपने लोगों के लिए कुछ अच्छा किया जाए। मुंबई की चकाचौंध में रहकर भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना और अपने समाज के लिए कुछ करने की चाहत – यही निशा ठाकुर की असली ताकत है।