जगत सिंह नेगी ने 31 मई, 2025 तक एफआरए से सम्बन्धित बैठकें आयोजित करने के दिए निर्देश

राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 एक ऐतिहासिक एवं प्रगतिशील अधिनियम है। जगत सिंह नेगी आज यहां वन अधिकार अधिनियम, 2006 (एफआरए) पर आयोजित कार्यशाला एवं जन संवाद की अध्यक्षता की।
एक दिवसीय मण्डल स्तरीय कार्यशाला एवं जन संवाद का आयोजन जनजातीय विकास विभाग के सौजन्य से किया गया।
कार्यशाला में विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार तथा कसौली के विधायक विनोद सुल्तानपुरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य लंबे समय से वन भूमि पर जीवन यापन करने वाले नागरिकों को भूमि का मालिकाना हक देना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार वन अधिकार अधिनियम को पूरे प्रदेश में लागू करने जा रही है। कार्यशालाओं के माध्यम से इस अधिनियम के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है ताकि पात्र लोगों को इसका लाभ मिल सके।
उन्होंने वन अधिकार अधिनियम के बारे में सूक्ष्मता से सभी को जागरूक किया तथा संबंधित अधिकारियों से अधिनियम के बारे किए गए कार्यों की जानकारी भी प्राप्त की।
जगत सिंह नेगी ने कहा कि सभी पंचायतों में वन अधिकार समितियां गठित करना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को समितियों को इस अधिनियम की जानकारी प्रदान करने के लिए विशेष प्रचार अभियान चलाने व कार्यशालाओं का आयोजन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के तहत आने वाले मामलों को ग्राम सभा सत्यापन के लिए उपमंडल स्तरीय समिति को भेजेगी, उपमण्डल स्तरीय समिति उन मामलों को सत्यापन कर ज़िला स्तरीय समिति को प्रस्तुत करेगी। तदोपरांत उपायुक्त की अध्यक्षता में ज़िला स्तरीय समिति मामलों का निपटारा और दस्तावेज़ीकरण कर स्वीकृति देगी। इसके उपरांत दावेदार को वन अधिकार मान्यता पत्र प्रदान किया जाएगा।
जगत सिंह नेगी ने राजस्व अधिकारियों को 31 मई तक वन अधिकार अधिनियम से सम्बन्धित बैठकों का आयोजन करने के निर्देश भी दिए।
राजस्व मंत्री ने इस अवसर पर अधिकारियों तथा पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
कार्यशाला में अवगत करवाया गया कि वन अधिकार कानून के अंतर्गत वन भूमि पर कानूनी अधिकार प्राप्त करने के लिए पात्र नागरिक निर्धारित फार्म पर दावा प्रस्तुत कर सकता है। दावेदार भूमि पर 13 दिसंबर, 2005 से पूर्व लगातार तीन पुश्तों से खेती कर रहा हो, निवास कर रह रहा हो, उस भूमि से घास ले रहा हो या भेड़ बकरी का पालन कर रहा हो तो वह मालिकाना हक के लिए आवेदन कर सकता है।
गैर सरकारी संगठनों के पदाधिकारियों ने सरकार की इस पहल को उत्कृष्ट करार देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार यह कदम उठाकर एक ऐतिहासिक कार्य कर रही है।
उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने इससे पूर्व राजस्व मंत्री सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया।
कार्यशाला में शिमला, सोलन, सिरमौर तथा किन्नौर ज़िला के पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों, अधिकारियों व गैर सरकारी संगठनों के लगभग 300 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर डॉ. यशवन्त सिंह परमार वानिकी एवं बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के कुलपति डॉ. राजेश्वर चंदेल, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, उपायुक्त सिरमौर सुमित खि़मटा, उपायुक्त किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा, जनजातीय विकास विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. विक्रम सिंह नेगी, जनजातीय विकास विभाग के संयुक्त निदेशक कैलाश चौहान सहित ज़िला सोलन, सिरमौर, शिमला तथा किन्नौर के ज़िला परिषद समिति के सदस्य, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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