शिमला IGMC में डॉक्टर और मरीज पक्ष के बीच हुई मारपीट के बाद मामला अब और गरमाता जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर डॉ. राघव नरूला की मां का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर तीखी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि मंत्री द्वारा उनके बेटे को “गुंडा” कहना पूरी तरह से असंवेदनशील और अनुचित है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना किसी ठोस जांच के एक डॉक्टर को दोषी कैसे करार दिया जा सकता है?
डॉक्टर की मां ने साफ कहा कि डॉ. राघव नरूला को तथ्यों की पड़ताल किए बिना दोषी घोषित किया गया, जबकि प्रशासन को पहले निष्पक्ष जांच करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में जल्दबाजी में फैसला लिया गया और मामले को जानबूझकर राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बेटे के खिलाफ बनाई गई धारणा पूर्वाग्रहपूर्ण है और इससे डॉक्टरों का मनोबल टूटता है।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उचित जांच हो, ताकि सच सामने आ सके। साथ ही अपील की कि संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले जिम्मेदार लोगों को संयम और गंभीरता दिखानी चाहिए, क्योंकि ऐसे बयानों से चिकित्सा सेवाओं पर भरोसा और सामाजिक संतुलन दोनों प्रभावित होते हैं।