आप लगातार रहतें हैं स्ट्रेस में, तो हो जाएँ सावधान ! स्ट्रेस हार्मोन ‘कोर्टिसोल’ के हाई होने से हो सकता है डायबिटीज, इससे से बचने के लिए इस तरह मैनेज करें स्ट्रेस

आप लगातार रहतें हैं स्ट्रेस में, तो हो जाएँ सावधान ! स्ट्रेस हार्मोन 'कोर्टिसोल' के हाई होने से हो सकता है डायबिटीज, इससे से बचने के लिए इस तरह मैनेज करें स्ट्रेस

आज के युग में हर किसी को कुछ न कुछ स्ट्रेस रहता ही है। क्यों कि आज के समय में भागदौड़ ज्यादा है। वर्किंग स्टाइल भी दबाव भरा होता है । जिससे लोगों में तनाव बढ़ रहा है और यह तनाव शारीरिक और मानसिक स्वास्थ दोनों को प्रभावित कर रहा है। और इससे कई तरह कि बिमारियों का खतरा भी बढ़ने लगा है। उन्हीं बिमारियों में से एक है डायबिटीज कि बीमारी। जब हम तनाव में रहते है तो बॉडी में कॉर्टिसोल हार्मोन रिलीज़ होता है उसके कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस यानि डायबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज दीमक कि तरह होता है जो शरीर को अंदर से बिलकुल कमजोर और खोखला कर देता है।  इस लेख में जानेगें कि हाई कोर्टिसोल (High Cortisol) की वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस (insulin resistance) कैसे हो सकता है ? साथ ही ये भी जानना जरुरी है कि स्ट्रेस से दूर कैसे रहें और इंसुलिन रेजिस्टेंस कैसे  मैनेज कर पाएं ताकि डायबिटीज से बचे रहें।

 

आईये जानते हैं कोर्टिसोल की वजह से इंसुलिन रेजिस्टेंस होता कैसे है

इन्सुलिन पैंक्रियाज़ द्वारा बनता है। जो हम खाना खाते हैं तो इससे ग्लूकोज बनता है और इंसुलिन इस ग्लूकोज को बॉडी के सेल्स तक पहुँचने में मदद करता है जिसके बाद बॉडी को एनर्जी मिलती है। कोर्टिसोल को स्ट्रेस हार्मोन के नाम से भी जाना जाता है। यह हार्मोन एड्रेनल ग्लैंड्स द्वारा तब रिलीज होता है जब शरीर तनाव में होता है । लगातार लम्बे समय तक स्ट्रेस में रहने से कोर्टिसोल ज्यादा बनता है जिससे मेटाबॉलिक प्रक्रियाएं असंतुलित हो जाती है और इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाता है क्यों की कोर्टिसोल बॉडी के सेल तक ग्लूकोज को पहुंचने से रोकता है, जिससे शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है।  इंसुलिन रेजिस्टेंस हो जाने पर,बॉडी कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति बहुत अधिक प्रतिरोधी हो जाती हैं,और ग्लूकोज को अवशोषित नहीं कर पाते। तो इससे खून में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है जिसे हाइपरग्लाइसेमिया कहते हैं, जो धीरे धीरे प्रीडायबिटीज़ और टाइप 2 डायबिटीज का कारण बनता है।

 

इन्सुलिन रेजिस्टेंस के ये सामान्य लक्षण होते हैं

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

वजन का बढ़ना

हर समय थकान लगते रहना

बार-बार भूख लगना

बार-बार प्यास लगना

बार बार पेशाव आना

ब्लड शुगर का बढ़ना , जो अक्सर टाइप 2  मधुमेह में बदल जाता है

नींद कम आना

ब्लड प्रेशर बढ़ जाना

बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाना

महिलाओं में असामान्य रूप से त्वचा पर हेयर ग्रोथ होना

कमज़ोर हड्डियाँ कमजोर हो जाना

एक्ने आदि ।

 

इंसुलिन रेजिस्टेंस मैनेज करने के तरीके

1) नियमित शारीरिक गतिविधि करें

३० मिनट रोज चलें, व्यायाम करें, साइकिल चलाएं और वजन उठायें । व्यायाम इंसुलिन संवेदनशीलता को बढ़ाने  और ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में सहायक होता  है।

 

2) अपनी डाइट को मैनेज करें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

साबुत अनाज जैसे की छिलके वाले अनाज खाएं, हेल्दी फैट जैसे अलसी अखरोट बादाम आदि खा सकते हैं और साग-सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार पर ध्यान दें। शुगर और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन न करें, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रित रह पायेगा और इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होने में मदद मिलता है।  Cortisol के स्तर को नियंत्रित करने के लिए मैग्नीशियम, ओमेगा 3 फैटी एसिड, प्रोटीन और फाइबर युक्त  डाइट लें। इसके लिए  पालक, बादाम, अलसी को शामिल करें।

 

3) पर्याप्त नींद लें

हर रोज कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद ले। नींद की कमी इंसुलिन संवेदनशीलता को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करते हैं। समय पर सोएं और समय पर उठें, रात को देर तक जागने से बचें।

 

4) स्ट्रेस मैनेज करें

शरीर और दिमाग को शांत करने के लिए मेडिटेशन या योग  करें। ये Cortisol को कम करता है। क्रॉनिक स्ट्रेस भी इंसुलिन संवेदनशीलता को नकारात्मक तरीके से प्रभावित करते हैं।

 

5) वेट मैनेज करें

वजन कम करके ख़ास करके पेट के आसपास, इंसुलिन सेंसटिविटी को काफी हद तक बढ़ा सकता है। ऐसा देखा गया है की जब वेट लॉस करते हैं तभी से इन्सुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में सुधार देखने को मिलता है।

 

6) कुछ प्रोडक्टिव कार्यों में बिजी रहे

 

इससे चिंता करने से बचे रहेंगे । जैसे कि आप अपने शौक की चीजें करें।  म्यूजिक गाएँ या सुनें,  पैंटिंड या ड्राइंग करें, नृत्य या कुकिंग , बागवानी और पशु पक्षियों को खाना देना आदि जो भी पसंद हो खाली समय में किया करें ।

 

7) फॅमिली और दोस्तों के समय बिताएं ।

 

जब हम चिंता से दूर रहते हैं तो कॉर्टिसोल का स्तर कम हो जाता है जिससे  इंसुलिन संवेदनशीलता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।

 

 

 

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें ।

 

BY: MADHU KUMARI Delhi School Of Journalism (University of Delhi)
BY: MADHU KUMARI Delhi School Of Journalism (University of Delhi)

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