सप्ताह भर चलने वाले स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत, हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू), शिमला ने माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के नेतृत्व में विकलांगता जागरूकता पर एक विचारोत्तेजक सिनेमाई संध्या का आयोजन किया। मानवाधिकार एवं विकलांगता अध्ययन केंद्र (सीएचआरडी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में हाल ही में रिलीज़ हुई एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जो लचीलापन, समावेशिता और विकलांग व्यक्तियों की क्षमता की पहचान जैसे विषयों पर प्रकाश डालती है।
सत्र की शुरुआत केंद्र के एक छात्र के ज्ञानवर्धक परिचय से हुई, जिसमें उन्होंने विकलांगता अधिकारों और विकलांग व्यक्तियों के जीवन के अनुभवों के बारे में सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के एक परिवर्तनकारी साधन के रूप में सिनेमा की भूमिका पर प्रकाश डाला। विकलांग बच्चों की एक बास्केटबॉल टीम और उनके कोच पर केंद्रित इस फिल्म ने दर्शकों का मन मोह लिया और खेल, विकलांगता और सशक्तिकरण के अंतर्संबंधों पर सार्थक बातचीत को प्रेरित किया।
प्रदर्शन के बाद, सीएचआरडी के सदस्यों द्वारा एक रोचक चर्चा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने समावेशी अवसरों की महती आवश्यकता और जीवन के सभी क्षेत्रों में समान मान्यता के महत्व पर विचार-विमर्श किया। इस सत्र में एचपीएनएलयू की कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना और विधि के एसोसिएट प्रोफेसर एवं सीएचआरडी के निदेशक डॉ. सचिन शर्मा की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम का समापन सीएचआरडी द्वारा अपने शैक्षणिक और वकालत प्रयासों के अलावा, सिनेमा जैसे रचनात्मक मंचों के माध्यम से जागरूकता, सहानुभूति और समावेशिता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि के साथ हुआ। इस सिनेमाई शाम ने एक सशक्त अनुस्मारक के रूप में कार्य किया कि गरिमा, समानता और अवसर मौलिक अधिकार हैं जिन्हें सभी के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए, चाहे उनकी क्षमता कुछ भी हो।