सोलन। खुम्ब अनुसंधान निदेशालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने कहा कि मशरूम की अच्छी पैदावार के लिए उच्च गुणवत्ता वाला स्पॉन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि स्पॉन तैयार करने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है—पहले प्योर कल्चर, फिर मास्टर स्पॉन और अंत में किसानों के लिए कमर्शियल स्पॉन तैयार किया जाता है। भारत में गेहूं, धान या बाजरा जैसे दानों पर आधारित ग्रेन स्पॉन सबसे अधिक उपयोग में लाया जाता है। दानों में निर्धारित नमी बनाए रखते हुए उन्हें स्टरलाइज किया जाता है और उपयुक्त तापमान पर इनक्यूबेशन किया जाता है।डॉ. कुमार ने बताया कि एक मास्टर स्पॉन बोतल 500 से 600 रुपये तक और कमर्शियल स्पॉन 100 से 200 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध है। किसानों को सलाह दी गई कि हमेशा ताजा स्पॉन ही खरीदें, जिसका माइसिलियम सफेद हो और उसमें किसी तरह का हरा, पीला या काला दाग तथा खराब गंध न हो।उन्होंने कहा कि बटन, ऑयस्टर और शिटाके स्पॉन को ठंडे तापमान पर रखा जा सकता है, जबकि ट्रॉपिकल मशरूम के स्पॉन को फ्रिज में रखना नुकसानदायक है। DMR द्वारा नियमित प्रशिक्षण और बुकिंग सुविधा भी उपलब्ध करवाई जाती है