सोलन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जलवायु परिवर्तन और उससे जुड़ी मौसमी बीमारियों को लेकर एक विशेष संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में चिकित्सा अधिकारियों को क्लाइमेट चेंज के कारण बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों पर जागरूक किया गया। इस दौरान वेक्टर जनित रोग, जल जनित रोग, हीट स्ट्रोक और एलर्जी जैसी बीमारियों पर चर्चा की गई तथा इनसे निपटने के लिए विभागीय तैयारियों की समीक्षा की गई।कार्यशाला का उद्देश्य आगामी गर्मियों के दौरान बीमारियों की रोकथाम और प्रभावी उपचार के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करना रहा, ताकि आम जनता को समय रहते जागरूक किया जा सके और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सके।मुख्य चिकित्सा अधिकारी अजय पाठक ने कहा कि सर्दी कम होते ही डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छर सक्रिय हो जाते हैं और यह खतरा पूरी गर्मी बना रहता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों के आसपास पानी जमा न होने दें और पूरी बाजू के कपड़े पहनें।सीएमओ ने जल जनित बीमारियों पर कहा कि यदि पानी की शुद्धता पर संदेह हो तो उसे उबालकर पीना सबसे सुरक्षित उपाय है और डायरिया-पेचिश के मौसम में बाहर का व बासी खाना खाने से बचना चाहिए। उन्होंने बताया कि नालागढ़, बद्दी और परवाणू जैसे क्षेत्रों में अधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक का खतरा रहता है, इसलिए दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप में निकलने से बचें, सिर ढकें और अधिक पानी पिएं।