सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल उस समय खुल गई, जब बिजली गुल होते ही पूरा अस्पताल अंधेरे में डूब गया। हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के वादे किए थे, लेकिन उनका असर जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दिया। बिजली जाने के बाद न तो जनरेटर चालू किया गया और न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई। गर्मी से बेहाल मरीज, जिनमें महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे, अंधेरे में घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। यह पहली बार नहीं है जब सोलन अस्पताल की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में आई हों। पहले भी कई बार जनरेटर और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर शिकायतें होती रही हैं, लेकिन प्रशासन की नींद अब तक नहीं टूटी है। मरीजों ने बताया कि गर्मी असहनीय हो रही थी, लेकिन अस्पताल प्रशासन को न तो मरीजों की चिंता थी, न ही जनरेटर चालू करने की जहमत उठाई गई। बुजुर्ग मरीजों ने कहा कि अगर समय पर इलाज नहीं हुआ तो उन्हें अगली सुबह दोबारा आना पड़ेगा। यहां इलाज कम और इंतजार ज्यादा मिलता है,लोगों ने मांग की है कि इस तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई हो और अस्पताल में तुरंत स्थायी समाधान लागू किए जाएंबाइट रोगी