सोलन के चंबाघाट में राष्ट्रीय उच्च मार्ग तालाब में तब्दील हो गया है, और इसके पीछे का असली कारण कोई और नहीं बल्कि होनहार इंजीनियरों की मेहरबानी है! हाईवे निर्माण में लगी कंपनी ने पानी की निकासी का कोई प्रबंध नहीं किया, जिससे सारा पानी फ्लाईओवर के नीचे जमा हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह की लापरवाही केवल ठेकेदारों और इंजीनियरों की अदूरदर्शिता को दर्शाती है। करोड़ों की लागत से बनने वाला हाईवे अब खुद ही पानी में डूबता नजर आ रहा है। क्या यही बडी योजनाओं की सच्चाई है?
इस जलभराव के कारण रोजाना यहां से गुजरने वाले हजारों वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी में फंसे वाहन, कीचड़ से भरे रास्ते और प्रशासन की चुप्पी—यह हाल देखकर लगता है कि हाईवे नहीं, बल्कि कोई डूबता जहाज बनाया जा रहा है! पानी की सही निकासी न होने से यह फ्लाईओवर खुद खतरे में पड़ सकता है। पहले भी पंचकूला में ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां लापरवाही के चलते फ्लाईओवर आज तक नहीं बन पाया। अब कहीं सोलन का यह फ्लाईओवर भी बर्बादी की कगार पर तो नहीं है। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह मल्टी-करोड़ प्रोजेक्ट सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। संबंधित विभाग को चाहिए कि तुरंत कार्रवाई करें।