स्कूलों की जर्जर इमारतों पर शिक्षा विभाग सख्त, निर्माण नियमों में आएगा बड़ा बदलाव

सोलन। डिप्टी डायरेक्टर गोपाल सिंह चौहान ने प्रदेश के कई स्कूलों में खराब संरचनाओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुरक्षा और विभाग के संसाधनों के सही उपयोग के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। शिकायतें मिली हैं कि कई स्कूल भवन, जो महज 7 से 15 साल पहले बने थे, अब जर्जर हालत में हैं। इनमें कुछ जगहों पर जमीन धंसने, कमजोर निर्माण सामग्री के उपयोग, छत (लेंटर) की खराबी, बिना अनुमोदन नक्शे पर निर्माण और बिना मिट्टी की जांच के निर्माण जैसे मामले सामने आए हैं। यहां तक कि कुछ ढांचे नालों के ऊपर भी बना दिए गए हैं।

डिप्टी डायरेक्टर गोपाल सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि अब से किसी भी स्कूल में निर्माण कार्य—चाहे वह एक कमरा हो या दस—बिना तय प्रक्रिया और जांच के नहीं होगा। नए दिशा-निर्देशों के तहत अनिवार्य मिट्टी की जांच, उचित स्थल चयन, मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग और सभी तकनीकी मानदंडों का पालन अनिवार्य होगा। अनुमति तभी दी जाएगी जब ये शर्तें पूरी होंगी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 20 से 40 साल चलने वाली इमारतें 10-15 साल में ध्वस्त न हों। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे जोखिम भरे ढांचों में बच्चों को पढ़ने के लिए क्यों मजबूर किया जाए।  उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग ने संकल्प लिया है कि भविष्य में किसी भी स्कूल निर्माण में नियमों की अनदेखी नहीं होगी और किसी भी तरह की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बाइट डिप्टी डायरेक्टर गोपाल सिंह चौहान