हिमाचल प्रदेश के सोलन ज़िले में सुबाथू के समिप गांव खाल्टू के दिक्षांत शर्मा को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक श्री गुलाबचंद कटारिया द्वारा नशा मुक्त भारत अभियान के तहत उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और चंडीगढ़ प्रशासन के तत्वावधान में नशा उन्मूलन के क्षेत्र में किए गए उनके असाधारण कार्यों के लिए प्रदान किया गया।
दिक्षांत शर्मा वर्तमान में पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ के समाजशास्त्र विभाग में एक छात्र शोधकर्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने नशा उन्मूलन और पुनर्वास के क्षेत्र में कई शोध परियोजनाओं और जागरूकता अभियानों का नेतृत्व किया है। वे चंडीगढ़ प्रशासन के समाज कल्याण विभाग के तहत 15 महीने तक आश्रितों के परामर्श और कौशल विकास पर केंद्रित एक प्रमुख अनुसंधान परियोजना के प्रधान शोधकर्ता भी रहे हैं।
दिक्षांत उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों— हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ और पंजाब में नशा मुक्ति अभियान को मजबूत करने के लिए सतत कार्य कर रहे हैं। उनकी विशेषज्ञता के चलते उन्हें दूरदर्शन और आकाशवाणी शिमला जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर नशा निवारण विषय पर विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जा चुका है।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी प्रभावी रूप से प्रतिनिधित्व किया है। वे नई दिल्ली में आयोजित यूथ पार्लियामेंट में प्रदेश के वक्ता रह चुके हैं और वर्ष 2023-24 में हिमाचल प्रदेश से राष्ट्रीय प्रेरणा दूत पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रमुख युवाओं में शामिल रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि से न केवल चंडीगढ़ और उत्तर भारत बल्कि हिमाचल प्रदेश, विशेष रूप से सोलन ज़िले के खाल्टू गांव का भी गौरव बढ़ा है। उनका कार्य और समर्पण समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।