स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर प्रदेश सरकार अब जनता की जेब काटने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। ताजा मामला सोलन अस्पताल का है, जहां अब ECG करवाने पर ₹30 और अल्ट्रासाउंड के लिए ₹150 वसूले जाएंगे। हैरान करने वाली बात यह है कि यह फैसला प्रदेश स्तर पर नहीं, केवल सोलन अस्पताल पर लागू किया गया है — जिससे यह साफ झलकता है कि स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने अपने ही विधानसभा क्षेत्र के साथ सौतेला व्यवहार किया है। भाजपा सोलन शहरी मंडल ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। शहरी भाजपा अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, “सरकार स्वास्थ्य सुधारों की बातें करती है लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि हर सेवा पर शुल्क थोपे जा रहे हैं। ये सीधे-सीधे गरीबों की उम्मीदों और जेब पर हमला है।” उन्होंने पूछा, “जब अस्पताल में 24 घंटे ऑक्सीजन प्लांट चलाने के लिए कर्मचारी नहीं हैं, वर्षों से कार्यरत स्टाफ को राज्य सरकार नियमित नहीं कर रही, तो ऐसे में मरीजों से पैसा वसूलना कहां तक जायज़ है?” गुप्ता ने सरकार पर आरोप लगाया कि चपरासी से लेकर डाटा ऑपरेटर और ड्राइवर तक की तैनाती के लिए रोगी कल्याण समिति से पैसे लिए जा रहे हैं, जबकि यह जिम्मेदारी सीधे राज्य सरकार की है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि आखिर क्यों सिर्फ सोलन को चुना गया? क्या यह राजनीति से प्रेरित फैसला नहीं है? तीन बार विधायक बनने के बावजूद धनीराम शांडिल ने बार-बार सोलन की जनता को नजरअंदाज किया है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि यह निर्णय तुरंत वापस नहीं लिया गया तो सड़कों पर उतरकर जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। सोलन की जनता अब और शोषण नहीं सहेगी। byte shailender gupta