12वीं फ़ेल हुए, टेंपो चलाया, पढ़ने के लिए भिखारियों संग सोये, Girlfriend ने साथ दिया, IPS बन गए

एक किताब है. इसका शीर्षक है, 12th फेल, हारा वही जो लड़ा नहीं. यह किताब एक वास्तविक कहानी पर है जो महाराष्ट्र…

कानपुर की छोटी सी फैक्ट्री में शुरू हुई ‘पहले इस्तेमाल करें…’ वाली घड़ी’ कैसे बनी आम भारतीय की पसंद

भारत में कई ऐसे प्रोडक्ट्स हैं जो भारत की ही धरती पर बने और पंसद किए गए. इसमें ‘पहले विश्वास…

रवीन्द्र कौशिक: पाकिस्तान में रह कर 20 हज़ार भारतीय सैनिकों की जान बचाने वाला ‘रियल टाइगर’

जासूसी का काम सुनने में जितना रोमांचक लगता हैस लेकिन उतना ही मुश्किल और जानलेवा होता है. ख़ासकर, जब इस काम…

History of Poha दास्तान-ए-पोहा, महाराष्ट्र से निकलकर पोहा कैसे बन गया इंदौरियों की पहचान का अहम हिस्सा?

दही-चूड़ा, चिवड़ा, सेव के साथ पोहा… या फिर चीनी के साथ ऐसे ही सादा. चूड़ा या पोहा एक ऐसी चीज़…

पैर देख बता देते थे ऊंट पर कितने लोग थे, मानेकशॉ आख़री वक़्त में जिसे याद करते रहे वो पागी कौन थे?

सैम मानेकशॉ. शायद ही कोई होगा, जो इस नाम से अंजान होगा. मानेकशॉ भारतीय सेना के वो अध्यक्ष थे, जिनके…

50 साल की उम्र में देहरादून की दो मम्मियों ने खड़ी कर दी कंपनी, सालाना 2 करोड़ रुपए कमाती हैं

कहते हैं इंसान को उम्मीद कभी नहीं छोड़ना चाहिए. बस दृढ़ विश्वास के साथ कर्म करते रहना चाहिए. सफलता देर-सवेर मिल…