आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर लगाम के लिए मुहिम तेज, नसबंदी और टीकाकरण पर जोर

सोलन शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए पशुपालन विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। पशुपालन विभाग सोलन के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. विवेक लांबा ने बताया कि कुत्तों में प्रजनन दर काफी अधिक होती है और एक बार में 8 से 10 पिल्लों का जन्म सामान्य बात है। यही कारण है कि यदि समय रहते नियंत्रण न किया जाए तो उनकी आबादी तेजी से बढ़ती जाती है।डॉ. लांबा के अनुसार, बहुत कम उम्र में कुत्तों की नसबंदी संभव नहीं होती। जब वे 6 से 12 महीने की आयु में प्रजनन योग्य हो जाते हैं, तब विभाग द्वारा उनकी नसबंदी (न्यूट्रलाइजेशन) की जाती है। यह कदम भविष्य में उनकी संख्या नियंत्रित करने का प्रभावी और मानवीय उपाय है।

उन्होंने बताया कि नसबंदी के दौरान कुत्तों को एंटी-रेबीज वैक्सीन भी लगाई जाती है, ताकि रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा कम किया जा सके। साथ ही, ऑपरेशन के बाद उनकी पहचान के लिए कान पर ‘C’ आकार का छोटा निशान बनाया जाता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि संबंधित कुत्ता पहले ही न्यूट्रलाइज किया जा चुका है और डॉग कैचर्स उसे दोबारा नहीं पकड़ते।डिप्टी डायरेक्टर ने यह भी बताया कि नसबंदी के बाद कुत्तों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखा जाता है। विशेषकर काटने और आक्रामकता की प्रवृत्ति में कमी आती है। इसके विपरीत, जिन कुत्तों की नसबंदी नहीं हुई होती, वे प्रजनन के मौसम में अधिक आक्रामक हो सकते हैं। विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अभियान में सहयोग करें, ताकि शहर को सुरक्षित और संतुलित बनाया जा सके।

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