भाई दूज, जिसे कार्तिक शुक्ल द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के स्नेह, विश्वास और पारिवारिक एकता का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनके सुख, समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती हैं। विशेषज्ञ मदन दत्त शर्मा के अनुसार, भाई दूज की सबसे विशेष परंपरा यह है कि भाई स्वयं अपनी बहनों के घर जाकर तिलक ग्रहण करते हैं। बहनों के घर जाकर भोजन करना और स्नेहपूर्वक उपहार भेंट करना इस पर्व की मुख्य विशेषता है।भोजन के बाद भाई बहनों को प्रेम और सम्मान के प्रतीक स्वरूप धन, वस्त्र या अन्य उपहार देते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भाई-बहन के गहरे पारिवारिक संबंधों और आपसी विश्वास को मजबूत करने का माध्यम भी है।पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन सूर्यपुत्र यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे, जहाँ यमुना ने उनका तिलक कर आदरपूर्वक भोजन कराया था। इसी स्मृति में यह पर्व “भाई दूज” के रूप में मनाया जाता है।
भाई दूज दीपावली पर्व श्रृंखला का अंतिम दिन माना जाता है। यह त्योहार भारतीय परिवारों में स्नेह, समर्पण और अपनत्व की भावना को और अधिक प्रगाढ़ करता है, जो समाज में पारिवारिक मूल्यों की निरंतरता का प्रतीक है।