सोलन, 4 जून — भारत में गर्मियों में बेहत तपन होती थी , सर्दियों में सिहरन और बरसात में ठंडी फुहारें पड़ा करती थी । लेकिन अब सभी मौसम जैसे अपनी पहचान खो बैठे हैं। न गर्मियों में वैसी गर्मी पड़ रही है, न सर्दियों में ठंड, और न ही बारिश अपने तय समय पर आ रही है। सभी मौसम अब बदरंग हो चुके हैं, और यह सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी बन गई है। सोलन के व्यापारियों का कहना है कि यह बदलाव अब सिर्फ चर्चा का विषय नहीं, बल्कि व्यापार, कृषि और सामान्य जीवन पर असर डालने वाला सच बन गया है। अगर यही स्थिति रही तो आने वाले वर्षों में न तो होली पर पड़ने वाली फुहारें रहेंगी, न दिवाली की ठंडी रातें। बच्चे सिर्फ किताबों में पढ़ेंगे कि कभी मौसम भी अपनी जगह और समय पर आते थे।
व्यापारी मनीष साहनी , सुशील शर्मा, विजय दुग्गल ने बताया, मौसम में हो रहा बदलाव कोई सामान्य बदलाव नहीं है। यह प्रकृति की वो भाषा है जो हमें चेतावनी दे रही है और हम अब भी अनसुना कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि मौसम की, ये अनिश्चितताएं सीधे तौर पर ग्लोबल वार्मिंग और बिना योजना के विकास से जुड़ी हैं। हर साल लाखों पेड़ विकास के नाम पर काटे जा रहे हैं, लेकिन उनके बदले एक भी पौधा नहीं लगाया जा रहा। बदले मौसम का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। समय पर न होने वाली बारिश और अनियमित तापमान से फसलें बर्बाद हो रही हैं। इसका असर बाजारों में महंगाई, आपूर्ति की कमी और व्यापार में गिरावट के रूप में सामने आ रहा है।बाइट व्यापारी मनीष साहनी , सुशील शर्मा,विजय दुग्गल