सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान केंद्र ने लोगों की मांसाहार की आदत कम करने और पशु बलि रोकने के उद्देश्य से एक अनोखा विकल्प तैयार किया है। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. ब्रिज लाल अत्रि ने बताया कि संस्थान ने ‘मीट मशरूम’ यानी वीगन मीट की तकनीक विकसित की है, जो स्वाद, बनावट और पोषण में मांस जैसा अनुभव देता है।
उन्होंने बताया कि मशरूम के माइसेलियम को विशेष तकनीक से मोटा कर उसे मांस जैसी आकृति दी जाती है। तरल सबस्ट्रेट पर उगाए गए माइसेलियम से लगभग डेढ़ महीने में यह उत्पाद तैयार हो जाता है। हार्वेस्ट के बाद इसमें ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं, जिससे इसका स्वाद और टेक्सचर बिल्कुल मांस जैसा बनता है।
डॉ. अत्रि ने कहा कि यह तकनीक बिना किसी जीव हत्या के पौष्टिक विकल्प देती है। भविष्य में इच्छुक कंपनियों के साथ एमओयू कर इसे बड़े स्तर पर बाजार में लाया जाएगा।