सोलन। संतान की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना को लेकर सोलन में माताओं ने अहोई माता का व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ रखा। इस अवसर पर महिलाओं ने दिनभर निर्जल व्रत रखकर संध्या के समय अहोई माता की विधिवत पूजा-अर्चना की और अपनी संतान की खुशहाली की कामना की। सोलन के मुरारी मार्केट स्थित दुर्गा माता मंदिर के पुजारी पंडित अनिल दत्त शर्मा ने अहोई माता व्रत के धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी।
पंडित अनिल दत्त शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में अहोई माता के व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, आरोग्यता और सुखमय जीवन की कामना के लिए रखती हैं। उन्होंने बताया कि अहोई माता का व्रत काफी हद तक करवाचौथ की तरह ही किया जाता है। महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद दिनभर निर्जल रहकर व्रत का पालन करती हैं। शाम को तारों के उदय होने पर अहोई माता की पूजा-अर्चना कर व्रत खोला जाता है।
उन्होंने बताया कि अहोई माता व्रत की परंपरा पंजाब और हरियाणा सहित उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में विशेष रूप से प्रचलित रही है। अब हिमाचल प्रदेश में भी इस व्रत के प्रति महिलाओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना के लिए पूरी श्रद्धा के साथ व्रत रखती हैं।
पंडित शर्मा ने कहा कि इस व्रत में सनातन धर्म और मां भगवती के प्रति श्रद्धा का विशेष महत्व है। अहोई माता की पूजा से जुड़ी मान्यताएं माताओं की अपनी संतान के प्रति ममता और समर्पण को दर्शाती हैं। उन्होंने बताया कि इस पर्व को लेकर बच्चों में भी खासा उत्साह रहता है। माताएं बच्चों की पसंद के पकवान तैयार करती हैं, जिससे परिवार में खुशी और उत्सव का माहौल बना रहता है।
संतान की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा अहोई माता का व्रत, तारों को अर्घ्य देकर की पूजा-अर्चना