सोलन। राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए कांग्रेस के वोट चोरी संबंधी आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता के बाद समय-समय पर यह प्रक्रिया अपनाई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व में हुए पुनरीक्षणों में से अधिकांश कांग्रेस शासनकाल में हुए थे।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि संविधान के अनुसार मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना और 18 वर्ष की आयु पूरी करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्थान बदलने वाले मतदाताओं के नाम नए पते पर दर्ज किए जाने चाहिए, जबकि मृत व्यक्तियों के नाम सूची से हटाना जरूरी है। उनके अनुसार, पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सांसद ने पार्टी के इतिहास से जुड़े विभिन्न चुनावी प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने सोनिया गांधी की नागरिकता, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के चुनाव से जुड़े मामले और डॉ. भीमराव अंबेडकर के चुनाव का जिक्र करते हुए कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। ये सभी दावे उन्होंने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान रखे।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में अनियमितताओं को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने फॉर्म छह से आठ का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर कांग्रेस की टिप्पणियों की भी आलोचना की।
ईवीएम के मुद्दे पर डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि चुनाव परिणामों के आधार पर मशीनों पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।
सोलन : मतदाता सूची पुनरीक्षण संवैधानिक प्रक्रिया, कांग्रेस के आरोप बेबुनियाद : डॉ. सिकंदर कुमार