सोलन। सोलन जिले में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप अब कम होने लगा है। हालांकि, बीमारी के कारण अब तक 34 पशुओं की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. विवेक लांबा के अनुसार, कुनिहार और अर्की क्षेत्र इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। जिले में हुई कुल मौतों में से लगभग आधी मौतें इन्हीं क्षेत्रों में दर्ज की गई हैं।
बीमारी की स्थिति का जायजा लेने के लिए सोमवार को भारत सरकार के संयुक्त सचिव ने सोलन का दौरा किया। इसके अलावा, एपिडेमियोलॉजी के उपनिदेशक डॉ. जीवन लाल के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने धर्मपुर और भोजनगर क्षेत्रों का निरीक्षण किया। टीम ने प्रभावित पशुपालकों से बातचीत करने के साथ बीमार पशुओं को दिए जा रहे उपचार की जानकारी ली। टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी।
डॉ. लांबा ने बताया कि जिले में बीमारी की रोकथाम के लिए 90,900 वैक्सीन खुराकें प्राप्त हुई थीं, जिन्हें पशुओं को लगाया जा चुका है। जिले में 70 प्रतिशत से अधिक पशुओं का टीकाकरण पूरा हो गया है। विभाग के अनुसार, टीकाकरण से संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद मिली है। फिलहाल बीमारी का प्रकोप पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। अब मुख्य रूप से उन पशुओं की मौतें हो रही हैं, जो पहले से गंभीर रूप से संक्रमित थे और पिछले सात से दस दिनों से उपचाराधीन थे।
लंपी स्किन डिजीज मुख्य रूप से मच्छरों और मक्खियों जैसे वाहकों के माध्यम से फैलती है। संक्रमित पशुओं को तेज बुखार आता है और शरीर पर मोटी गांठें बन जाती हैं। इसके कारण उन्हें खाने-पीने में परेशानी होती है और कमजोरी बढ़ने से उनकी जान भी जा सकती है।
पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि पशुओं में तेज बुखार या शरीर पर गांठें दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें, ताकि समय रहते उपचार किया जा सके।