सोलन। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता बनने के बाद मुकेश शर्मा ने सोलन में अपनी पहली प्रेस वार्ता में भाजपा के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने 10 गारंटियों को लेकर भाजपा नेताओं की ओर से किए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल और चुनावी वादों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा को कांग्रेस सरकार की आलोचना करने से पहले अपने कार्यकाल के वादों का हिसाब देना चाहिए।
मुकेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में 1.36 लाख सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्णय लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ओपीएस लागू करने के बाद केंद्र सरकार ने हिमाचल की ऋण लेने की सीमा में 1,600 करोड़ रुपये की कटौती की, जो प्रदेश के हितों के साथ अन्याय है।
उन्होंने राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनके अनुसार, पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश को 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक का आरडीजी मिला था, जबकि वर्तमान सरकार के दौरान इसमें लगातार कमी आई। उन्होंने कहा कि कर हिस्सेदारी में मामूली वृद्धि से प्रदेश की वित्तीय चुनौतियां पूरी नहीं हो सकतीं।
मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि पूर्व भाजपा सरकार प्रदेश पर करीब 76 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और 11 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़कर गई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए प्रयासरत है। किसाऊ परियोजना में बचत, ओबेरॉय होटल मामले में कानूनी सफलता और प्राकृतिक खेती के उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करना इसके उदाहरण हैं।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार जनहित में काम करती रहेगी और वर्ष 2027 में व्यवस्था परिवर्तन पार्ट-2 के नारे के साथ पूर्ण बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी।