सोलन। नौणी पंचायत के पूर्व प्रधान मदन हिमाचली ने मौसम में बदलाव, पर्यावरण क्षरण और अनियंत्रित विकास पर चिंता जताते हुए कहा कि इसका सीधा असर किसानों की आजीविका और फसलों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रकृति के साथ बढ़ती छेड़छाड़ से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका खामियाजा आम लोगों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
मदन हिमाचली के अनुसार, प्रदेश में मौसम का चक्र तेजी से बदल रहा है। मानसून के अंतिम दौर में भी बेमौसमी बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे खेतों में तैयार हो रही फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने भूमिगत जल स्रोतों के पर्याप्त पुनर्भरण को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि बारिश होने के बावजूद जल स्रोतों की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि आने वाले समय में क्षेत्र को पानी की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि इस बार टमाटर उत्पादकों को उचित दाम नहीं मिल पाए, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। किसानों को उम्मीद थी कि मक्की की फसल से कुछ नुकसान की भरपाई हो सकेगी, लेकिन लगातार हो रही बेमौसमी बारिश के कारण मक्की की फसल भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में किसानों के सामने उत्पादन और आमदनी, दोनों का संकट खड़ा हो गया है।
मदन हिमाचली ने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में अंधाधुंध पेड़ कटान, अनियंत्रित निर्माण और विकास के नाम पर प्रकृति से छेड़छाड़ पर्यावरणीय असंतुलन को बढ़ा रही है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, योजनाबद्ध विकास और जल स्रोतों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में कृषि और जनजीवन से जुड़ी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
सोलन में मौसम के बदलते मिजाज से कृषि संकट गहराया, टमाटर और मक्की की फसल प्रभावित: मदन हिमाचली