हिमाचल प्रदेश की सोलन सेब मंडी और परवाणू उपमंडी में इस वर्ष सेब की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। प्रतिकूल मौसम के कारण सेब उत्पादन प्रभावित होने से मंडियों में पहुंचने वाली पेटियों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम रही है। हालांकि, कम उत्पादन के बावजूद किसानों को इस सीजन में उनकी उपज के अपेक्षाकृत बेहतर और स्थिर दाम मिले हैं।
कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) सोलन के सचिव राघव सूद ने बताया कि इस सीजन में अब तक सोलन मंडी में करीब 6 लाख 62 हजार सेब की पेटियां पहुंच चुकी हैं। वहीं, परवाणू उपमंडी की आवक को मिलाकर दोनों मंडियों में कुल करीब 9 लाख 66 हजार सेब की पेटियां पहुंची हैं। पिछले वर्ष इसी अवधि तक दोनों मंडियों में लगभग 27 लाख पेटियां पहुंच चुकी थीं। इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दोनों मंडियों में सेब की आवक करीब 33 प्रतिशत ही रह गई है।
उन्होंने बताया कि मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों का असर इस वर्ष सेब उत्पादन पर साफ तौर पर देखने को मिला है। कई क्षेत्रों में उत्पादन कम रहने के कारण मंडियों में सेब की आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके बावजूद किसानों को बाजार में उनकी फसल के अच्छे दाम मिले हैं।
विशेष रूप से गोल्डन सेब के दाम इस वर्ष किसानों के लिए राहत देने वाले रहे हैं। आमतौर पर सितंबर के मध्य तक गोल्डन सेब के भाव घटकर करीब 400 से 500 रुपये प्रति पेटी तक पहुंच जाते थे, लेकिन इस बार इनका कारोबार करीब 1200 से 1400 रुपये प्रति पेटी तक हुआ है। इससे कम उत्पादन के बीच किसानों को बेहतर मूल्य मिलने से कुछ राहत मिली है।
हालांकि, पिछले तीन-चार दिनों से कश्मीर से सेब की आवक शुरू होने के कारण बाजार में कीमतों पर थोड़ा दबाव आया है। इसके बावजूद सोलन और परवाणू मंडियों में किसानों को उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुसार उचित मूल्य मिल रहा है।