शूलिनी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, शिक्षक भर्ती, तबादला नीति और स्कूलों के युक्तिकरण को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि वर्ष 2009 में स्थापित संस्थान ने कम समय में शोध, पेटेंट और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में उल्लेखनीय पहचान बनाई है। उन्होंने निजी और सरकारी शिक्षण संस्थानों को एक-दूसरे की बेहतर कार्यप्रणाली अपनाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में छात्र-शिक्षक अनुपात देश में बेहतर है और औसतन 10 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए करीब 9 हजार नियुक्तियां की जा चुकी हैं। वहीं चयन आयोग के माध्यम से 6 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अनावश्यक तबादले रोकने के लिए पारदर्शी तबादला नीति बनाने पर काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शैक्षणिक सत्र के दौरान स्थानांतरण पर रोक लगाना और शिक्षकों को कम से कम एक से तीन वर्ष तक स्थिर कार्यकाल उपलब्ध करवाना है।
रोहित ठाकुर ने बताया कि कम छात्र संख्या वाले करीब 1500 स्कूलों को बंद, डी-नोटिफाई या मर्ज किया गया है। इनमें 750 स्कूल ऐसे थे, जहां एक भी विद्यार्थी नहीं था, जबकि अन्य 750 में केवल एक या दो विद्यार्थी थे। इन स्कूलों से मुक्त हुए करीब 4 हजार शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को जरूरत वाले संस्थानों में समायोजित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल साक्षरता के क्षेत्र में आगे है और अब सरकार का लक्ष्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाना है। इसी दिशा में संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक सुधार किए जा रहे हैं।