स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के विभिन्न स्कूलों में बच्चों और युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एंटी-चिट्टा अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत विद्यार्थियों को नशे से होने वाले शारीरिक, मानसिक और सामाजिक नुकसान की जानकारी देने के साथ-साथ उन्हें नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. अजय पाठक ने बताया कि बच्चों में नशे की शुरुआत कई बार जिज्ञासा, दोस्तों की देखादेखी और सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण होती है। किशोरावस्था में बच्चे आसानी से दूसरों के प्रभाव में आ सकते हैं। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षकों और समाज की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे बच्चों की गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखें और उनके साथ खुलकर संवाद करें।
डॉ. पाठक ने कहा कि चिट्टा और अन्य नशीले पदार्थ युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर सकते हैं। नशे की शुरुआत भले ही प्रयोग या मनोरंजन के तौर पर हो, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर लत का रूप ले सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे के प्रति आकर्षित करने वाले किसी भी प्रलोभन से बचने तथा गलत संगत से दूर रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशा एक छलावा है, जो व्यक्ति से उसका स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और भविष्य छीन लेता है। बच्चों को अपनी ऊर्जा सकारात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। इसके लिए खेलकूद, संगीत, कला, पढ़ाई और अन्य रचनात्मक हॉबीज को अपनाना बेहतर विकल्प है।
सीएमओ ने कहा कि नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान तभी सफल होगा, जब स्वास्थ्य विभाग के साथ स्कूल, अभिभावक और समाज मिलकर प्रयास करें। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने साथियों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने की अपील की। स्वास्थ्य विभाग आने वाले समय में भी स्कूलों में जागरूकता गतिविधियों को जारी रखेगा।
BITE – CMO AJAY PASTHAK