टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 के तहत सोलन जिले में टीबी की जांच को और तेज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के हाई रिस्क गांवों में विशेष शिविर लगाकर लोगों की जांच की जा रही है। अभियान के तहत ग्रामीणों के छाती के एक्स-रे समेत अन्य आवश्यक जांच की जा रही हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने बताया कि जिले में पहले दो हैंड-हेल्ड एक्स-रे मशीनों की मदद से जांच का कार्य किया जा रहा था। अब विभाग को चार नई अत्याधुनिक मशीनें मिल गई हैं। इन मशीनों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिपोर्टिंग प्रणाली स्थापित की जानी है। यह प्रक्रिया आगामी कुछ दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद जिले के प्रत्येक ब्लॉक में एक-एक मशीन उपलब्ध करवाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि जिले में करीब 635 से 636 हाई रिस्क गांव चिन्हित किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब तक करीब 350 गांवों को अभियान के तहत कवर कर चुका है। नई मशीनों के पूरी तरह संचालित होने के बाद जांच की रफ्तार बढ़ेगी और विभाग को अगले एक महीने में निर्धारित लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।
सीएमओ ने लोगों से टीबी के संभावित लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शाम के समय बुखार, लगातार थकान, भूख कम लगना, वजन कम होना, शरीर में गांठें या 14 दिन से अधिक समय तक खांसी रहने पर तुरंत जांच करवानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कोविड-19, ब्रोंकियल अस्थमा, सीओपीडी या किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को कम अवधि की खांसी होने पर भी बलगम की जांच करवानी चाहिए। यदि जांच रिपोर्ट नकारात्मक आती है, लेकिन लक्षण बने रहते हैं तो 15 दिन बाद दोबारा जांच करवाने की सलाह दी गई है। समय पर जांच और उपचार से टीबी की पहचान कर उसे फैलने से रोका जा सकता है। BITE – CMO AJAY PATHAK