श्रावण मास के अंतिम सोमवार के अवसर पर लोर बाजार स्थित सनातन धर्म मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य भरत ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की पूजा-अर्चना और सावन सोमवार के धार्मिक महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस दिन शिव मंदिर में जाकर रुद्राभिषेक और विधि-विधान से पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
आचार्य भरत ने बताया कि श्रद्धालु संभव हो तो पार्थिव शिवलिंग बनाकर भगवान शिव का पूजन करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे मनोकामनाओं की पूर्ति और कष्टों से मुक्ति मिलती है। विद्यार्थियों के लिए भी शिव पूजन को विद्या प्राप्ति में लाभकारी माना गया है।
उन्होंने कहा कि विवाह में विलंब होने पर युवतियां सोमवार का व्रत और शिव पूजन कर सकती हैं। वहीं युवक भी अच्छी नौकरी, सुयोग्य जीवनसाथी, धन और विद्या की कामना के लिए भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं।
मुख्य पुजारी ने पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ के जाप को भगवान शिव की आराधना का सरल माध्यम बताया। उन्होंने रोगों से मुक्ति की कामना रखने वाले श्रद्धालुओं को महामृत्युंजय मंत्र के जाप की सलाह भी दी।
आचार्य भरत ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के बाद धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। इसी अवधि में चतुर्मास का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सावन के अंतिम सोमवार पर श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव आराधना करने का आह्वान किया।
सावन के अंतिम सोमवार पर शिव पूजन का विशेष महत्व, आचार्य भरत ने बताए रुद्राभिषेक और मंत्र जाप के लाभ