शहर में बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए गए एक रियलिटी चेक में युवतियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए सुरक्षा व्यवस्था और सामाजिक मानसिकता से जुड़ी कई महत्वपूर्ण चिंताएं सामने रखीं। छात्राओं और युवतियों का कहना है कि शहर के कुछ सार्वजनिक स्थानों, मेलों तथा भीड़भाड़ वाले आयोजनों में उन्हें असहज और असुरक्षित महसूस होता है।
युवतियों ने बताया कि कई बार भीड़ के बीच गलत तरीके से छूने, घूरने और अभद्र व्यवहार जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है, जिससे वे मानसिक रूप से प्रभावित होती हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं अक्सर सामने नहीं आ पातीं, लेकिन इनका असर लंबे समय तक बना रहता है। इसके अलावा शहर में बढ़ते नशे के मामलों ने भी चिंता बढ़ाई है। कुछ क्षेत्रों में नशेड़ियों की मौजूदगी के कारण युवतियां वहां से गुजरते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने को मजबूर हैं।
युवतियों ने कहा कि सुरक्षा का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की सोच भी एक बड़ी चुनौती है। उनका मानना है कि अक्सर लड़कियों के पहनावे और जीवनशैली पर सवाल उठाए जाते हैं, जबकि गलत व्यवहार करने वालों की जवाबदेही तय करने पर कम ध्यान दिया जाता है।
छात्राओं ने बताया कि अब वे शिक्षा, आवास और करियर से जुड़े निर्णय लेते समय भी सुरक्षा को प्राथमिकता देने लगी हैं। युवतियों का मानना है कि नशे पर सख्त नियंत्रण, सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर निगरानी और सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव से ही महिलाओं को वास्तविक सुरक्षा का एहसास मिल सकेगा।