सोलन: भक्ति से जन्मा हुनर: सोलन के उज्जवल की ‘श्री श्रृंगार’ कला मूर्तियों में भर रही नया जीवन

हिमाचल प्रदेश के सोलन के अपर बाजार में एक साधारण व्यापारी उज्जवल आज अपनी असाधारण कला के कारण लोगों के दिलों में खास जगह बना रहे हैं। उनकी ‘श्री श्रृंगार’ कला केवल एक काम नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का जीवंत उदाहरण बन चुकी है। देवी-देवताओं की मूर्तियों को वे जिस बारीकी और प्रेम से सजाते हैं, उसे देखकर हर कोई यही कह उठता है—“अब तो मूर्ति जैसे बोल पड़ेगी। उज्जवल खास तौर पर लड्डू गोपाल, गणपति और माता रानी की मूर्तियों को दिव्य रूप देते हैं। उनकी बनाई सजावट न केवल सुंदर होती है, बल्कि पूरी तरह वाटरप्रूफ भी होती है, जिससे मूर्तियों की चमक लंबे समय तक बनी रहती है। आज सोलन ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों में भी उनकी इस कला की भारी मांग है।
उज्जवल ने बताया कि इस कला की सबसे खास बात यह है कि उज्जवल ने इसे कहीं से सीखा नहीं, बल्कि यह उनके भीतर एक ‘भाव’ के रूप में जन्मी। करीब पांच-छह साल पहले, जब वे मंदिरों में अधूरा श्रृंगार देखते थे, तो उनके मन में सेवा का भाव जागता था। उन्होंने इसे ‘मेकअप’ नहीं, बल्कि ‘श्री श्रृंगार’ नाम दिया—क्योंकि उनके अनुसार भगवान की सेवा साधारण नहीं, बल्कि दिव्य होती है।                                           आज उज्जवल की कहानी यह सिखाती है कि अगर मन में सच्ची श्रद्धा और लगन हो, तो बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के भी इंसान अपने हुनर को ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उनका सफर इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि जब काम में भक्ति जुड़ जाती है, तो वह केवल पेशा नहीं, बल्कि प्रेरणा बन जाता है।

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