सोलन स्थित राज्य बीज परीक्षण प्रयोगशाला की सहायक बीज परीक्षण अधिकारी डॉ. रितु सूद ने किसानों को बेहतर पैदावार के लिए बिजाई से पहले बीजों की गुणवत्ता जांच कराने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में बीजों की जांच ‘बॉटम ऑफ द पेपर’ और ‘टॉप ऑफ द पेपर’ विधियों से की जाती है।
उन्होंने जानकारी दी कि गेहूं जैसे बड़े बीजों के लिए ‘बॉटम ऑफ द पेपर’ विधि अपनाई जाती है, जबकि प्याज और सरसों जैसे छोटे बीजों के लिए ‘टॉप ऑफ द पेपर’ तकनीक उपयोग में लाई जाती है। बीजों को निर्धारित तापमान और आर्द्रता में सीड जर्मिनेटर में रखा जाता है, जहां उनके अंकुरण की प्रक्रिया का परीक्षण किया जाता है।
डॉ. सूद ने बताया कि बीजों की गुणवत्ता को नॉर्मल, एबनॉर्मल और डेड सीडलिंग श्रेणियों में बांटा जाता है। नॉर्मल सीडलिंग में जड़ और शूट का संतुलित विकास होता है, जबकि एबनॉर्मल और डेड सीडलिंग में विकास प्रभावित रहता है। उन्होंने कहा कि निर्धारित मानकों से कम अंकुरण प्रतिशत होने पर बीजों को अस्वीकार कर दिया जाता है।
कुछ बीजों के लिए विशेष उपचार भी जरूरी होता है, जैसे धान के बीजों को हॉट एयर ओवन में रखने के बाद भिगोया जाता है, जबकि सरसों व पत्तागोभी जैसे बीजों के लिए प्री-चिलिंग प्रक्रिया अपनाई जाती है।
उन्होंने किसानों और विक्रेताओं से अपील की कि वे बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रयोगशाला में जांच अवश्य करवाएं, ताकि बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।