सनातन धर्म मंदिर में होली पर्व को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिर के पुजारी हेमराज शर्मा ने बताया कि यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस वर्ष होलिका दहन शाम करीब 7:15 बजे विधि-विधान के साथ संपन्न होगा। पौराणिक कथा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे हिरण्यकश्यप की बहन होलिका अपने वरदान के अभिमान में अग्नि में बैठी, लेकिन भगवान का स्मरण करने वाले भक्त प्रहलाद सुरक्षित बच गए और होलिका दहन हो गई। इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मंदिर के पुजारी हेमराज शर्मा ने बताया कि मंदिर में दिन के समय होली का स्तंभ और ध्वज स्थापित किया जाएगा, जिसके बाद श्रद्धालु दिनभर पूजा-अर्चना कर सकेंगे। पुजारी ने जानकारी दी कि अगले दिन चंद्र ग्रहण के कारण विशेष सावधानियां बरती जाएंगी। सुबह 5:00 बजे से सूतक काल आरंभ होगा, जबकि ग्रहण दोपहर 3:20 से शाम 4:45 बजे तक रहेगा। इस अवसर पर चावल, दूध आदि का दान अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने और दान-पुण्य करने की अपील की गई है।