युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए सहायक जिला शारीरिक शिक्षा अधिकारी (ADPEO) अशोक चौहान ने खेलों को इससे बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम बताया है। पिछले तीन वर्षों से उच्च शिक्षा उप-निदेशक कार्यालय में सेवाएं दे रहे चौहान ने कहा कि आज नशा एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुका है, और बच्चों को इससे दूर रखने के लिए खेल ही सबसे सशक्त विकल्प है। अशोक चौहान के अनुसार, पहले समाज में यह धारणा थी कि केवल पढ़ाई ही सफलता का रास्ता है, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उनका कहना है कि जो बच्चे नियमित रूप से खेलते हैं, उनका मानसिक विकास बेहतर होता है, वे शारीरिक रूप से मजबूत बनते हैं और उनकी सीखने की क्षमता भी बढ़ती है। इसके विपरीत, खेलों से दूर रहने वाले बच्चों में कार्यक्षमता की कमी और नशे जैसी बुरी आदतों की आशंका अधिक देखी जा रही है।
अशोक चौहान ने बताया कि सरकार भी खेलों को बढ़ावा देने के लिए खिलाड़ियों को आकर्षक इंसेंटिव और नौकरियों के अवसर प्रदान कर रही है। मेडल विजेताओं को लाखों-करोड़ों रुपये की पुरस्कार राशि दी जा रही है। हालांकि हर बच्चा खिलाड़ी नहीं बनता, लेकिन खेल से मिलने वाली फिटनेस, अनुशासन और आत्मविश्वास जीवन की हर चुनौती में सहायक होते हैं।ADPEO ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को 3-4 वर्ष की उम्र से ही खेलों और फिटनेस की ओर प्रेरित करें, खाली समय को रचनात्मक गतिविधियों में लगाएं और उन्हें गलत संगत से दूर रखें। उनका मानना है कि खेल भावना ही एक स्वस्थ और अनुशासित समाज की नींव है।