सोलन में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने पंचायत चुनावों, सेब आयात शुल्क और भाजपा सांसदों की भूमिका को लेकर ऐसे सवाल खड़े किए हैं, जो सीधे तौर पर भाजपा की नीयत और नीति दोनों पर गंभीर चोट करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनाव कभी भी पार्टी सिंबल पर नहीं होते, इसके बावजूद भाजपा जानबूझकर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर भ्रम फैलाने का काम कर रही है। चुनावों में देरी को लेकर भाजपा द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश इस समय आपदा से जूझ रहा है—लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा और शिमला के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के कारण रास्ते बंद हैं। ऐसे में भाजपा का चुनावी हल्ला संवेदनहीनता का परिचायक है। सरकार ने हाई कोर्ट की टिप्पणी का अध्ययन कर संवैधानिक प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है, लेकिन भाजपा तथ्यों के बजाय सस्ती राजनीति में लगी हुई है।
भाजपा सांसदों पर सबसे तीखा हमला बोलते हुए अनिरुद्ध सिंह ने उन्हें “कठपुतली” करार दिया और कहा कि देश में चाहे आपदा आए या आम जनता के खिलाफ कानून बनाए जाएं, हिमाचल से चुने गए सातों सांसद संसद में चुप्पी साध लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का असली चरित्र किसानों और बागवानों के मुद्दे पर उजागर हो जाता है। सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 20 प्रतिशत घटाने के फैसले को उन्होंने हिमाचल की आर्थिकी पर सीधा हमला बताया और कहा कि इससे प्रदेश के लगभग 5000 करोड़ रुपये के सेब राजस्व पर गहरा असर पड़ेगा। अनिरुद्ध सिंह के मुताबिक भाजपा का इतिहास किसानों और बागवानों से सिर्फ झूठ बोलने और चुनावी वादों से बहलाने का रहा है। जिला परिषद कर्मचारियों के मुद्दे पर भी उन्होंने साफ किया कि मामला वित्त विभाग में विचाराधीन है और सरकार उचित फैसला लेगी—जबकि भाजपा केवल भ्रम और असंतोष फैलाने में जुटी है। कुल मिलाकर, अनिरुद्ध सिंह के बयानों ने भाजपा की कथनी-करनी के अंतर को एक बार फिर सार्वजनिक बहस के केंद्र में ला दिया
आपदा में चुनावी राजनीति, संसद में चुप्पी और सेब पर वार: अनिरुद्ध सिंह के तीखे आरोपों से भाजपा कटघरे में