जिले में एचआईवी एक खामोश लेकिन खतरनाक रफ्तार से पैर पसार रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय पाठक ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पिछले कैलेंडर वर्ष में जिले में 105 नए एचआईवी पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। यह आंकड़ा न केवल स्वास्थ्य विभाग के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चेतावनी है।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन मामलों में लगभग 2.5 प्रतिशत संक्रमित 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। डॉ. पाठक ने इसे भविष्य के लिए बेहद खतरनाक संकेत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में कड़े प्रोटोकॉल के चलते ब्लड ट्रांसफ्यूजन या मेडिकल सिरिंज से संक्रमण की आशंका अब लगभग समाप्त हो चुकी है। उन्होंने खुलासा करते हुए बताया कि असल खतरा समाज में फैल रहे नशे के चलन से जुड़ा है। ड्रग यूज़र्स द्वारा एक ही सिरिंज का बार-बार इस्तेमाल एचआईवी और हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों को तेजी से फैला रहा है। यही नहीं, औद्योगिक क्षेत्रों—बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ और परवाणू—में प्रवासी मजदूरों, ट्रक चालकों और सेक्स वर्कर्स के बीच जोखिम और अधिक है, जहां एनजीओ के माध्यम से जागरूकता और कंडोम वितरण किया जा रहा है।
सीएमओ ने समाज में फैली एक खतरनाक गलतफहमी पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि पुरुषों या ट्रांसजेंडर के साथ संबंध बनाने से एचआईवी नहीं फैलता। असुरक्षित यौन संबंध किसी के साथ भी संक्रमण फैला सकते हैं।डॉ. अजय पाठक ने चेताया कि सामने आए मामले सिर्फ टिप ऑफ द आइसबर्ग हैं—असल संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि 95 प्रतिशत लोग अपनी एचआईवी स्थिति जानें और समय पर इलाज शुरू करें। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने, भ्रांतियों को छोड़ने और सुरक्षित व्यवहार अपनाने की अपील की।
जिले में HIV का साइलेंट विस्फोट: 105 नए मरीज, बच्चों तक पहुंचा संक्रमण; नशा और भ्रांतियां बन रहीं सबसे बड़ा खतरा