स्वच्छता ही सफलता की कुंजी, मशरूम उत्पादन में लापरवाही पड़ सकती है भारी: डॉ. बृज लाल अत्री

सोलन: राष्ट्रीय खुम्ब अनुसंधान केंद्र , सोलन के कार्यकारी निदेशक (एक्टिंग डायरेक्टर) डॉ. बृज लाल अत्री ने मशरूम उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा करते हुए स्वच्छता को सबसे अहम पहलू बताया है। उन्होंने कहा कि मशरूम की खेती में थोड़ी सी भी गंदगी पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए किसानों और बागवानों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।डॉ. अत्री ने बताया कि निदेशालय में करीब 20 किस्मों के मशरूम उगाए जाते हैं, लेकिन व्यावसायिक स्तर पर सभी किस्मों का उत्पादन संभव नहीं होता। वर्तमान में देश में मुख्य रूप से बटन, ढींगरी, मिल्की, पराली और सिटाके मशरूम का व्यावसायिक उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत में कुल लगभग चार लाख टन मशरूम का उत्पादन होता है, जिसमें करीब 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले बटन मशरूम का है। बाजार में बटन मशरूम की अधिक उपलब्धता और अन्य किस्मों के प्रति जागरूकता की कमी इसका बड़ा कारण है।डॉ. बृज लाल अत्री ने  कहा कि विभाग अब जागरूकता अभियानों, किसान मेलों और प्रदर्शनियों के माध्यम से लोगों को अन्य मशरूम किस्मों और उनके पोषण संबंधी फायदों के बारे में जानकारी दे रहा है, ताकि लोग इन्हें अपने दैनिक आहार में शामिल कर सकें। मशरूम को उन्होंने एक संपूर्ण और पौष्टिक आहार बताया।स्वच्छता को लेकर चेतावनी देते हुए डॉ. अत्री ने कहा कि यदि उत्पादन इकाई और उसके आसपास साफ-सफाई नहीं रखी जाती, तो फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मशरूम में वेट बबल डिजीज, येलो मोल्ड और कीट जैसी समस्याएं आम हैं, जो गंदगी के कारण तेजी से फैलती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मशरूम एक फंगस है और यदि इसे सही वातावरण और स्वच्छता नहीं मिली, तो उत्पादकता में भारी गिरावट आती है।अंत में उन्होंने सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि मशरूम की खेती खुले खेत में फसल उगाने जैसी नहीं, बल्कि एक ऑपरेशन थिएटर या प्रयोगशाला को संभालने जैसी है, जहां थोड़ी सी भी लापरवाही पूरी फसल को बीमार कर सकती है। इसलिए बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के लिए स्वच्छता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

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