सोलन। खुम्ब अनुसंधान केंद्र सोलन के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनिल कुमार ने मशरूम उत्पादकों को फसल में होने वाली जीवाणु जनित बीमारियों से सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि मशरूम में सॉफ्ट रोट, येलो ब्लॉच और मम्मी डिजीज प्रमुख बैक्टीरियल समस्याएं हैं, जो बटन, ढींगरी और शिटाके सहित सभी प्रजातियों को प्रभावित करती हैं। इन रोगों के लिए मुख्य रूप से ‘सूडोमोनास’ बैक्टीरिया जिम्मेदार होते हैं। उपचार के लिए उन्होंने 0.5 ग्राम ब्लीचिंग पाउडर या कैल्शियम क्लोराइड प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करने की सलाह दी। साथ ही कहा कि संक्रमित मशरूम बाजार में नहीं बिकते, इसलिए उत्पादन प्रोटोकॉल का पालन कर ही अच्छी गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकती है।डॉ. कुमार के अनुसार येलो ब्लॉच में मशरूम की टोपी पीली पड़ने लगती है और तना फटना शुरू हो जाता है। वहीं सॉफ्ट रोट और मम्मी डिजीज में फ्रूट बॉडी पर पानी जैसे धब्बे दिखाई देते हैं तथा मम्मी डिजीज में तना मुड़कर सख्त हो जाता है। उन्होंने किसानों को सिंचाई और नमी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सिंचाई के बाद कमरे में उचित वेंटिलेशन जरूरी है ताकि सतह पर जमी पानी की बूंदें जल्दी सूख सकें। नमी 80 से 85 प्रतिशत के बीच रखी जानी चाहिए और फॉगर का अनावश्यक उपयोग नहीं करना चाहिए।