राष्ट्रीय खुम्ब अनुसंधान केंद्र, सोलन ने गुच्छी मशरूम की खेती के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र में तैनात सीनियर साइंटिस्ट अनिल कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि गुच्छी मशरूम पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ-साथ उच्च आर्थिक मूल्य वाली फसल है और इसके विशेष गुण इसे अन्य मशरूम से अलग पहचान देते हैं।उन्होंने बताया कि देश में गुच्छी मशरूम की खेती को लेकर पूर्व वर्षों में कई परियोजनाएं चलाई गईं। वर्ष 2019 में एक विशेष परियोजना के अंतर्गत अनिल कुमार और उनकी टीम ने इस मशरूम की खेती की तकनीक विकसित करने पर कार्य शुरू किया। करीब दो-तीन वर्षों की निरंतर मेहनत के बाद गुच्छी मशरूम की सेमी-कंट्रोल्ड खेती तकनीक विकसित कर ली गई, जो पॉलीहाउस और नेट हाउस में अपनाने योग्य है। इस तकनीक की जानकारी हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के किसानों के साथ साझा की जा चुकी है।निदेशालय द्वारा किसानों के साथ एमओयू किए जा रहे हैं और कम लागत वाले इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में भी सहयोग दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ किसानों के क्षेत्र का दौरा कर जलवायु और पर्यावरण का अध्ययन करने के बाद उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
अनिल कुमार ने बताया कि जंगलों से एकत्र की जाने वाली गुच्छी मशरूम में कुछ स्थानों पर हेवी मेटल प्रदूषण की समस्या पाई गई है, जिससे बाजार मूल्य प्रभावित होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंडोर यानी पूरी तरह नियंत्रित वातावरण में खेती की आवश्यकता महसूस की गई है।उन्होंने बताया कि केंद्र में इंडोर कल्टीवेशन को लेकर दो वर्षीय विशेष परियोजना चल रही है, जिसके परिणाम उत्साहजनक हैं। अब प्रयास इस तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर लाने का है, ताकि भविष्य में किसानों को प्रदूषण-मुक्त और लाभकारी गुच्छी मशरूम की खेती उपलब्ध कराई जा सके।