टीबी नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग सख्त, मरीज सहायता और टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश

क्षय रोग नियंत्रण को मजबूती देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों और उनकी टीमों ने भाग लिया। बैठक में बीते माह किए गए कार्यों की समीक्षा के साथ आगामी रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान टीबी मरीजों को सहायता उपलब्ध करवाने और टेस्टिंग में तेजी लाने पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. अजय पाठक ने बताया कि निक्षय पोषण किट उन सभी मरीजों को उपलब्ध करवाई जाएंगी जो इसकी सहमति देते हैं। उन्होंने कहा कि ये किटें सामाजिक सहयोग और दान के माध्यम से जुटाई जाएंगी ताकि जरूरतमंद हर मरीज तक यह सुविधा 100% सुनिश्चित की जा सके।
टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश जारी करते हुए उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर गांव-गांव में विशेष शिविर लगाए जाएं। विशेष रूप से डाइबिटीज, हाईपरटेंशन, पूर्व टीबी मरीज, कोविड-19 संक्रमित, सीओपीडी, कैंसर व कीमोथेरेपी ले रहे मरीजों जैसे संवेदनशील वर्गों में खांसी के शुरुआती लक्षण पर भी टीबी की जांच की जानी चाहिए।
डॉ. पाठक ने बताया कि हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा ताकि उन मरीजों में भी टीबी का जल्द निदान हो सके जिनकी बलगम जांच सामान्य आती है।
स्वास्थ्य विभाग ने जनता से अपील की है कि टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य रोग है। 10–15 दिन की खांसी, शाम का बुखार, रात को पसीना, भूख में कमी, वजन घटना या शरीर पर गांठें मिलने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करवाएं। किसी भी सब-सेंटर या पीएचसी में नमूना जमा करवाने की सुविधा उपलब्ध है।

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