सोलन। डायरेक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च (डीएमआर) द्वारा किसानों, बेरोजगार युवाओं और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विभिन्न प्रकार के मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य युवाओं को वैज्ञानिक पद्धति से मशरूम उत्पादन, प्रबंधन और विपणन की जानकारी देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। डीएमआर के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि संस्थान में बड़े उद्यमियों के लिए नौ दिवसीय, सामान्य अभ्यर्थियों के लिए पांच दिवसीय तथा एससी/एसटी और टीएसपी कंपोनेंट के तहत एक से दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त विशेष मशरूम किस्मों जैसे बटन, ऑयस्टर, मिल्की, किंग ऑयस्टर और रेशियम पर तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान अभ्यर्थियों को ‘हैंड्स ऑन ट्रेनिंग’ के माध्यम से व्यावहारिक रूप से सब कुछ सिखाया जाता है, जिसमें फार्म डिजाइन, उत्पादन प्रबंधन और फसलोपरांत तकनीक की जानकारी दी जाती है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद यदि किसी को कठिनाई आती है तो डीएमआर तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराता है। छोटे किसानों को ये सेवाएं निशुल्क दी जाती हैं, जबकि बड़े उद्यमियों से मामूली शुल्क लिया जाता है। डॉ. सतीश ने बताया कि इच्छुक व्यक्ति ईमेल या डीएमआर की वेबसाइट के माध्यम से प्रशिक्षण के लिए आवेदन कर सकते हैं, जहां मासिक गतिविधियों और सलाहों की पूरी जानकारी उपलब्ध है।byte Dr Satish Kumar