आम आदमी पार्टी के अधिवक्ता राजीव शर्मा ने बघाट बैंक में हुए घोटाले और कुप्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि बैंक में सवा अरब रुपये (लगभग ₹15 अरब) की हेराफेरी और एनपीए (Non-Performing Assets) से जुड़ी गड़बड़ियां लंबे समय से सुनियोजित तरीके से की गईं। यह घटना लोगों के विश्वास के साथ किया गया एक बड़ा विश्वासघात है, विशेषकर उन खाताधारकों के साथ जिन्होंने कठिन समय में अपनी पूंजी बैंक में जमा की थी। शर्मा ने कहा कि अब त्यौहारों के समय में आम खाताधारकों को ₹10,000 से अधिक राशि निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इससे बीमार या जरूरतमंद लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है, जिन्हें इलाज के लिए बार-बार बैंक और अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने छोटे खाताधारकों के शोषण पर कड़ा रोष जताया। शर्मा ने आरोप लगाया कि बैंक के निदेशकों और अधिकारियों ने अपात्र लोगों को अधूरे कागजातों पर ऋण दिए और बदले में लाभ प्राप्त किया। जबकि आम आदमी को छोटे ऋण के लिए भी संपत्ति की पूरी जांच करवाई जाती है। उन्होंने मांग की कि मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच करवाई जाए और दोषियों की संपत्ति व बैंक खातों की जांच कर उनके धन पर रोक लगाई जाए। साथ ही ईडी द्वारा उनकी आय और व्यय की जांच कराई जाए ताकि उनकी अतिरिक्त आय के स्रोतों का खुलासा हो सके।बाइट Rajeev sharma