हिमाचल प्रदेश की वादियों में इस बार आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोलन, शिमला और धर्मशाला में रह रहे बिहार के लोगों ने अपने राज्य से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहते हुए भी छठ पर्व पूरे श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मनाया। सोलन में भी चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का समापन आज उगते सूर्य को अर्घ्य देकर हुआ, जिसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत पूर्ण हुआ। सुबह तीन बजे से ही व्रती परिवार पूजा स्थलों पर पहुंचने लगे थे। सूर्य देव के दर्शन होते ही सभी ने अर्घ्य अर्पित कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु की कामना की। नदी न होने के बावजूद बिहार समुदाय के लोगों ने कृत्रिम घाटों का निर्माण किया और परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखा। सोलन में तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो “मिनी बिहार” बस गया हो। हिमाचल की ठंडी वादियों में जब सूर्य की पहली किरण फूटी, तो यह साबित हो गया कि सच्ची आस्था किसी सीमा या भौगोलिक दूरी की मोहताज नहीं होती — जहां श्रद्धा हो, वहीं से संस्कृति की नई रोशनी फैलती है।
राम प्रकाश और प्रियंका वालिया ने बताया कि छठ पूजा अत्यंत कठिन और अनुशासित व्रत है, जिसमें व्रती 36 घंटे तक बिना जल और अन्न ग्रहण किए उपवास रखते हैं। पूजा के बाद ठेकुआ, हलवा और फलों का प्रसाद बांटा गया। इस अवसर पर स्थानीय लोग भी शामिल हुए और इस पर्व को एकता का प्रतीक बताया। प्रियंका वालिया ने कहा कि “मैं पंजाबी हूं, लेकिन इस पर्व की आस्था और अनुशासन देखकर अभिभूत हूं।” उनके अनुसार छठ केवल पूजा नहीं, बल्कि विश्वास और संस्कृति की गहराई का प्रतीक है।
बाइट राम प्रकाश और प्रियंका वालिया