सोलन,
हिमाचल की शांत वादियों में रविवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने यह साबित कर दिया कि सच्ची श्रद्धा किसी सीमा या भौगोलिक बंधन में नहीं बंधती। सोलन में जब बिहार समुदाय के लोगों ने पूरे भक्तिभाव से छठ महापर्व का आयोजन किया, तो शहर “मिनी बिहार” में बदल गया। भले ही यहां बिहार समुदाय के लोग संख्या में कम हैं, लेकिन उनके उत्साह, समर्पण और आस्था ने पूरे वातावरण को भक्ति से भर दिया।
छठ पूजा आमतौर पर नदी किनारे अर्घ्य देकर संपन्न होती है, लेकिन सोलन में नदी न होने के बावजूद श्रद्धालुओं ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने सामूहिक प्रयासों से कृत्रिम घाट तैयार किए और भगवान भास्कर को संध्याकालीन अर्घ्य अर्पित किया। डूबते सूरज को जल अर्पित करते समय जब व्रतियों ने ‘छठ मइया’ के पारंपरिक गीत गाए, तो पूरा वातावरण भक्ति और उल्लास से गूंज उठा।
आयोजन समिति से जुड़े राम प्रकाश और अभय यादव ने बताया कि सोलन में पिछले चार वर्षों से प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थल पर सामूहिक छठ पूजा का आयोजन किया जा रहा है। पहले श्रद्धालु अलग-अलग स्थानों पर छोटे समूहों में पूजा करते थे, जिससे आयोजन बिखरा हुआ लगता था। लेकिन अब सभी श्रद्धालु एक ही स्थान पर मिलकर इस महापर्व को धूमधाम से मना रहे हैं।
राम प्रकाश और अभय यादव ने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि जब मन में सच्चा विश्वास और परंपरा के प्रति निष्ठा हो, तो भौगोलिक सीमाएँ भी आस्था के आगे झुक जाती हैं। सोलन में यह पर्व एकता, संस्कृति और भारत की विविधता की सशक्त मिसाल बन गया है।।byte Ram prakash,Abhay Yadav